मजदूर दिवस के अवसर पर : एस डी एम ने मजदूरों को किया सम्मानित***
आर.पी.पान्डेय के साथ प्रदीप गुप्ता की रिपोर्ट**


इस दिन को खासतौर पर कामगारों/कर्मचारियों के सम्मान के रूप में जाना जाता है। कोतवाल अरुण कुमार मौर्य बताया कि विश्व में मज़दूर दिवस का इतिहास
बता दें कि, इसी दिन 1886 को अमेरिका में हजारों मजदूरों ने एक साथ मिलकर 15 घंटे काम कराने के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी। ये अमेरिका में औद्योगिककरण का भी दौर था जहां मजदूरों का अमीरों द्वारा बेतहाशा शोषण होता था। एक मई की इस मजदूर क्रांति के बाद से हर साल एक मई को मजदूर दिवस के रूप में ही मनाया जाने लगा। तथा क्षेत्राधिकारी अंबिका राम ने कहा मजदूरों के दम पर ही आज बड़ी-बड़ी इमारतें बड़े-बड़े इंडस्ट्रीज और फैक्ट्रियां चलती है अगर मजदूर ना हो तो कोई भी निर्माण कार्य सिर्फ मशीन की सहायता से पूरा नहीं हो सकता ।
जिस प्रकार मकान बनाने के पहले उसकी नींव रखी जाती है बिना उसके मकान नहीं तैयार किया जा सकता हमारे मजदूर भाई भी उसी प्रकार प्रत्येक निर्माण कार्य में उस नीम की भूमिका निभाते हैं इनके बिना हर काम अधूरा है मैं अपने मजदूर भाइयों के साथ हूं हम से जो भी मदद की जरूरत हो हमसे आकर मिले और बताएं इनकी सेवा और मदद करना हमारा सौभाग्य होगा । इस अवसर पर प्रवीण सिंह, संगम शुक्ला, अमन सिंह, आदि लोग मौजूद रहे