डाकबिभाग के कर्मचारियों ने सरकार के नितियो से नाराज होकर किया प्रदर्शन
अनअनील वर्मा की रिपोर्ट
गोरखपुर जनपद के डाकबिभाग की है यह घटना इसलिए बता रहा हूँ ताकि सबको पता चल सके कि हमारे विभाग के अधिकारियों की जिद और छोटी सी लापरवाही कितनी भयावह रूप ले सकती है कि प्रधान डाकघर के 45 कर्मचारी कोरोना संक्रमित हो गए हैं।
इसके अलावा उनके परिवार के कितने सदस्य संक्रमित हुए हैं इसकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीँ हुई है और तो और गोरखपुर और महाराजगंज के डाक कर्मचारियों को ऐसी कठिन परिस्थिति में इसी लापरवाही के चलते आज तक वेतन नहीं मिला
और अभी कबतक नहीं मिलेगा पता नहीं।अब आपको बताता हूँ वह घटनायें जिनके चलते यह भयावह स्थिति उत्पन्न हुई,इस कोरोना काल में ippb खाते खुलवाने की अधिकारियों की जिद जिसमें कर्मचारियों को थम्ब लेने के लिए प्रत्येक जमाकर्ता के हाथ को मशीन पर लगवाना पड़ता है कर्मचारियों को टारगेट देकर दबाव दिया गया।इस कोरोना काल में वेतन और पेंशन वितरण प्रणाली की ब्यवस्था में परिवर्तन, पहले सभी की पोस्टिंग प्रधान डाकघर से ही हो जाती थी परंतु अधिकारियों की नासमझी के चलते स्टेट बैंक के द्वारा इसकी पोस्टिंग का करार हो गया और 25 जुलाई को सिस्टम मैनेजर और दो डाक कर्मचारी स्टेट बैंक चेक और लिस्ट लेकर जाते हैं जिस बैंक कर्मचारी को वह चेक और लिस्ट दी जाती है वह कोरोना पॉजिटिव निकलता है
जबतक सिस्टम मैनेजर को पता चलता है तबतक यानी कि 5 दिन तक वह सारे डाकघर के कर्मचारियों के सम्पर्क में आ जाता है।जबतक उसको इसकी जानकारी होती है तबतक सभी कर्मचारी अपने एक विदाई समारोह के आयोजन में शामिल होते हैं वहां से भी संक्रमण फैलता हैं इसी बीच अधिकारी अपनी जिद में महाराज गंज प्रधान डाकघर जहां सारे ही कर्मचारी कोरोना संक्रमित होकर कोरेंटिन किये गए थे प्रधान डाकघर से कर्मचारियों को विस्थापित करके भेजने का आदेश किया जिसके कारण कर्मचारियों में आंदोलन की स्थिति बनी सभी कर्मचारियों ने बाहर इकट्ठा हो कर प्रदर्शन किया वहां भी संक्रमण फैला क्यों कि तबतक सिस्टम मैनेजर के पॉजिटिव होने की किसी को जान कारी नहीं थी।जबतक जानकारी हुई तबतक बहुत देर हो चुकी थी महामारी ने सभी डाक कर्मचारियों को अपने आगोश में ले लिया था प्रधान डाकघर से पूरे गोरखपुर के सभी डाकघरों को नगदी और डाक का आदान प्रदान होता है कितने अभिकर्ता और जनता का आवागमन वहां होता है सभी जानते है सभी में कितने लोग और उनके परिवार संक्रमण के शिकार हुए होंगे ईश्वर ही जाने,यह तो जांच का विषय है।लेकिन यह तो तय है कि डाक विभाग के अधिकारियों और एक छोटी लापरवाही ने कितना भयावह रूप ले लिया है।और तो और आज 8 अगस्त तक गोरखपुर और महाराज गंज किसी भी डाक कर्मचारी को वेतन ना मिलने के कारण इस कठिन स्थिति में दवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और हमारे डाक विभाग के अधिकारी मौन है कोई वैकल्पिक ब्यवस्था भी नहीं बना पाए रहे है।हमारा निवेदन है कि कर्मचारियों के वेतन भुगतान की शीघ्र ब्यवस्था किया जाय।ताकि कर्मचारी अपना ओर अपने परिवार की जांच और दवा की ब्यवस्था कर सकें।आज भी अधिकारियों की आंख नहीं खुली अब भी pli/rpli का मेला लगाया जा रहा है,जो कर्मचारी गंभीर हैं उनको दवा और अन्य ब्यवस्था की किसी को फिक्र नहीं है।