जन्मदिन को बैदिक विधि विधान से मनावे,मतबुझावें जलाकर के दीप ना काटें नाम का केक नीरज

जन्मदिन मे ज्योती जलाकर बुझानें तथा नाम लिखे केक काटकर कदापि मत मनावें जन्मदिन –नीरज

आशुतोष कुमार पांडेय /श्रीनिवास तिवारी की रिपोर्ट 

 

 

 

 

 

आज के समय मे हमारे समाज मे बहुत तेजी से एक प्रचलन जन्मदिन मनाने का हो गया है पर हम जन्मदिन मनाते तो है पर उस समय हम कुछ गलतियों को कर देते है जैसे मोमबत्ती जलाते तो है पर जब वह प्रकाश विखेरता है तब तक उसे हम फूक मारकर बुझा देते है जबकी हमे कदापि ऐसा नही करना चाहिए क्योंकि आज शायद इसी प्रथा के अनुसरड़ का फल है कि जब हम अपने जिंदगी में प्रकाश फैलानें की सोचते है तो प्रभू और प्रकृति को ऐसा महशूस होता है कि हमें अपनें जीवन में कभी भी प्रकाश का अहमियत दिया ही नही और एक समय आता है कि जिंदगी मे जब हमनें उजाले को छिपा अंधेरे की कामना किया है तो कही ना कही हम सभी के जिंदगी में अंधेरा घेर लेता है और हम उसी में भटकते रहते है और उजाला कही दूर दूर तक नही दिखता इतना ही नही हम सभी जो अपने नाम का लिखा केक मगांते है और दीपक बुझानें के साथ ही साथ हम उस केक को चाकुओं से काटकर टुकड़े टुकडे़ कर देते है और सगें संवंधियों में बाट देते है यह भी सही और ठीक नही इसका भी खामियाजा हम सभी को भुगतना पड़ता है फलत: उसपर भी हमसभी को बिचार करते हुए अपनें सोच में परिवर्तन करना चाहिए और बैदिक परंम्परा के तहत अपनें आराध्य का ध्यान कर उनके श्री चरणों में प्रसाद फल मिष्ठान रख उनके समकक्ष दीपक ज्योती जला अपनें जिंदगी के सलामती की कामना करे तो वह बहुत ही बेहतर होगा क्योकी परमपिता परमेश्वर से जो हम मन क्रम बन से जो भी आस्था पुर्वक मांगते है हमसभी को वह वैसे ही प्रभू द्वारा दिया जाता है इसलिए हम कभी भी अपना यां अपनों का जन्मदिन बैदिक परंम्परा से मनाते हुए जीवन की ज्योती जलानें सुखमय रहने़ की कामना करे इन्हीं भावनाओं के साथ एक बार फिर आप सभी लोगों को पंडित नीरज तिवारी के तरफ से साधुबाद,माता विन्ध्वासिनी आप सभी के जीवन को सुखमय बनावें, जय श्रीकृष्णा जय श्री राधे!🙏

 

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