श्रावण मास क्यूं पसंद है महादेव को*और क्यूं इतना महत्वपूर्ण है*
श्रावण मास का आरंभ ही गुरु पूर्णिमा से हो जाता है। और श्रावण मास से ही चतुर्मास प्रारंभ हो जाता है
गरु पूर्णिमा से प्रारंभ होना श्रावण मास यह साबित करता है कि शिव आज भी गुरु है। *वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं शंकर रुपिणम्, यमाश्रितो हि वाक्रोपि चंद्रह सर्वत्र बंधते* अखंड ब्रह्मांड में देवताओं में शिव या शिवांश को ही गुरु बनाया जाता है। अन्यथा किसी और देवता को नही । श्रावण शब्द का मतलब ही (सुनना या कान ) होता है। यह मास हमें प्रेरणा देता है कि पहले गुरु करो, और उनके शब्दों को सुनो और अपने जीवन को सफल बनाओ
महादेव को भी कथा कहना और सुनना दोनों पसंद है। श्री राम चरित मानस में प्रसंग आता है *राम कथा मुनिबर्ज बखानी*
*सुनि महेश परम् सुख मानी*
*रिषि पुछि हरि भगति सुहाई*
*कहि शंभु अधिकारी पाई*
भगवान शिव जी कथा कहे और कथा सुनें। ऐसे अनेको प्रमाण शास्त्रों में है। श्रावण मास में शिव पुराण, श्री राम चरित मानस व श्रीमद् भागवत कथा कहने और सुनने पर भगवान शिव अति प्रसन्न होते है। जो भी जीवात्मा श्रावण मास में इन कथाओं को श्रवण करता है वह जीवात्मा जन्म मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।
क्यूं चढ़ता है भगवान शिव पर *भाग धतुरा और जल*
समुद्र मंथन भी श्रावण मास में ही हुआ था जिसमें से रत्न के रुप में सर्व प्रथम काल कुट विष निकला था उस विष से श्रृष्टि का विनाश होता देख महादेव ने उसे ग्रहण किया। विष के प्रभाव से शिव जी को अत्यधिक जलन होने लगी।
तभी सभी देवताओं ने शिव जी के उपर जल गिराना प्रारंभ किया
यहां तक कि देवताओं ने भगवान शिव के उपर भांग, धतूरा, बेलपत्र, पंचामृत, कुशामृत,दुध, दही, गन्ने का रस पुरे मास चढ़ाते रहें तब शिव जी को विष के जलन से राहत मिली। तब महादेव जी प्रसन्न होकर समस्त देवताओं, मनुष्यों, राक्षसों, नागों,यक्ष, किन्नर, गंधर्व आदि सभी को बरदान दिया कि श्रावण मास में जो भी हमारा इन सभी सामग्रीयों से अभिषेक करेगा हम उसकी सभी इच्छाएं पूरी करेंगे।
श्रावण मास से ही चतुर्मास प्रारंभ होता है चतुर्मास में तप , साधना,यज्ञ, वैराग्य व तीर्थाटन करने से जीव संसार बंधन से मुक्त हो जाता है।
माता पार्वती जी कि तपस्या भी श्रावण मास में ही पुरी हुई थी।या यह कहें कि शिव पार्वती का प्रथम मिलन भी श्रावण मास में ही हुआ था। इसलिए पसंद है महादेव को श्रावण मास।
श्रावण मास ही प्रकृत के तपीस ,(गर्मी ) को अपने जल से शांत करता है, श्रावण मास में ही नवीन वृक्षों का सृजन होता है,
*सावन सुहागन का श्रृंगार है
प्रकृति पर उपकार है
सावन आनंद है
शिव को पसंद हैं