न्याय की आस में दर दर भटक रही सत्यभामा के समस्या का जिम्मेदार क्यों नहीं करा रहे स समाधान
खबर उत्तर प्रदेश के जनपद बाराबंकी तहसील हैदरगढ़ के ग्राम सभा अल्मा पुर से है जहां की रहने वाली पिड़िता सत्यभामा पुत्री तेज बहादुर जो एक समाचार पत्र की पत्रकार भी हैं आम जनमानस की समस्या समाधान के लिए आवाज उठाती रही है पर हैरत की बात है कि सरकार लोकतंत्र के चतुर्थ स्तंभ को भीड़ का हिस्सा नहीं मानती है वहीं कोर्ट और सरकार द्वारा भी पत्रकार उत्पीड़न करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के दावे किए जाते हैं पर वह सभी दावे सत्यभामा के मामले में धूल धूसरित होते जा रहे हैं और सत्यभामा के परिजनों को दबंगों द्वारा मार पीट कर यह कहकर दबा दिया जाता है कि हमारा कुछ होने को नहीं है
क्योंकि हमारे घर पर धनबल के साथ जन बल और शासन प्रशासन को मैनज करनें की एक खास ब्यवस्था है और बात भी सही दिखने को मिल रही है कि सर्कस दबंगों द्वारा तमाम बार सत्यभामा के परिजनों को मारा-पीटा गया उसके यहां नाली निर्माण दबंगों द्वारा कर लिया गया पर जिम्मेदार अधिकारी मूनक दर्शक बने रहे विवस होकर सत्यभामा ने बीते तहसील दिवस पर जिलाधिकारी बाराबंकी के पैर पकड़ गिड़गिड़ाने लगी और बोली न्याय ना मिलेगा तो मैं जान दे दूंगी जिसके
जिलाधिकारी ने त्वरित संज्ञान में लिया और जांच के आदेश दिए पर उपजिलाधिकारी द्वारा मामले में लीपापोती कर दिया गया और आज तक समस्या समाधान नहीं हो सका है और पिड़ित सत्यभामा हैरान व परेशान
जिसकी इस मामले की जानकारी हेतु जिलाधिकारी बाराबंकी तथा उपजिलाधिकारी हैदरगढ़ के सरकारी नंबर पर संपर्क करने का प्रयास हुआ पर समाचार भेजें जानें तक सही सटीक जानकारी नहीं मिल सका!