मरीजो का समुचित सेवा भाव से इलाज करना मेरी नैतिक जिम्मेदारी डाक्टर प्रतिमा
आशुतोष कुमार पाण्डेय की रिपोर्ट
हम मरीजों को छोड़ नहीं सकते क्योंकि हम सेवा भाव से करते हैं उनका इलाज पढ़ाई कर डिग्री लेकर बैठना तो ठीक नहीं डाक्टर प्रतिमा*गोरखपुर जनपद के चौरीचौरा में बीते लगभग 9 वर्षो से मरीजों का इलाज करने वाली महिला चिकित्सक डाक्टर प्रतिमा मिश्रा से अखबारों में छपे एक खबर के सापेक्ष जब उनका पक्ष जानने के लिए पहुंचे पूछा गया कि आपके यहां एक वर्ष में दो बार स्वास्थ्य महकमे द्वारा छापेमारी कर पाली क्लिनिक को सील कर दिया गया उसके बाद से ही आप तहसील गेट के निकट मरीजों का इलाज कर रही है तो ज़बाब में डाक्टर प्रतिमा मिश्रा ने कहा
आज नौ वर्षों से चौरीचौरा में जरूरतमंद मरीजों का समुचित इलाज सेवा भाव से करती आई हूं सो उन्हें मैं अधर मे नहीं छोड़ सकती और सस्ता शुभ सेवा देने की वजह से मरीज हमें नहीं छोड़ सकते रही बात स्वास्थ्य विभाग के द्वारा छापेमारी कर कार्यवाही करने की तो हर लोग अपने अपने तरीके से काम करते हैं स्वास्थ्य विभाग का काम है समय समय पर रूटीन चेकअप कर बिना डिग्री धारक जो मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ करते हैं उन तक बिना छापेमारी के नहीं पहुंच सकते और ना ही उसपर अंकुश भी लग सकता है ऐसी दशा में स्वास्थ्य विभाग की टीम अपने तौर तरीके से काम करती है और हम पढ़ लिख कर रजिस्ट्रेशन करा कर घर तो बैठ नहीं सकते इसलिए मैं अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर मरीजों का सेवा भाव से इलाज करती हूं जिसके लिए मैं बतौर एथराइज हूं और ओपीडी मैं कहीं भी स्वास्थ्य विभाग को सूचना देकर कर सकती हूं*