कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि 3 नवंबर दिन रविवार को भ्रातृ द्वितीया भैया दूज का पावन पर्व मनाया जाएगा. इसी दिन चित्रगुप्त भगवान की पूजा,कलम दवात की पूजा भी किया जाता है. परंपरा अनुसार इस दिन बहनों को अपने भाई के मस्तक पर तिलक लगाना चाहिए तथा भाइयों को अपनी बहन के हाथ से भोजन करना चाहिए और द्रव्य वस्त्र आदि कुछ उपहार प्रदान कर बहनों को सम्मानित करना चाहिए,इससे भाइयों के आयु एवं यश कीर्ति में वृद्धि होती है.
इस सम्बंध मे श्री हनुमत ज्योतिष सेवा संघ के संस्थापक अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य पं. बृजेश पाण्डेय ने बताया कि काशी से निर्मित पंचांगों के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 2 नवम्बर दिन शनिवार को रात्रि 7 बजे से लग रही है और 3 नवम्बर दिन रविवार को रात्रि 8 बजकर 22 तक द्वितीया तिथि है इस आधार पर उदयातिथि अनुसार 3 तारीख को ही भैया दूज का त्योहार मनाया जायेगा.इस दिन अनुराधा नक्षत्र सौभाग्य योग का संयोग बहुत ही शुभफलदायक है. ज्योतिषाचार्य पं. बृजेश पाण्डेय ने भाई दूज पर्व को मनाने के पीछे पौराणिक कथाएँ बताते हुए कहा कि एक दिन जब बहन यमुना ने भाई यमराज को गोलोक में भोजन के लिए बुलाया तो बहन के घर जाने से पहले यम ने नरक के निवासियों को मुक्त कर दिया था. इसलिए भाई दूज का पर्व मनाया जाता है,इसके अलावा एक कथा भगवान श्री कृष्ण से जुड़ी है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण राक्षस नरकासुर को हराने के बाद अपनी बहन सुभद्रा से मिलने गये थे, तभी से इस दिन को भाई दूज के रूप में मनाया जाता है.