कमिश्नर व डीआईजी ने संपूर्ण समाधान दिवस में की औचक जांच, 92 मामलों में मौके पर केवल 4 का हुआ निस्तारण
(बांसगांव गोरखपुर से सुबास चंद की रिपोर्ट)
शनिवार को बांसगांव तहसील सभागार में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस पर एडीएम (राजस्व एवं वित्त) विनीत सिंह की अध्यक्षता में कार्यक्रम चल रहा था कि दोपहर 12:40 बजे गोरखपुर मंडल के कमिश्नर अनिल कुमार ढींगरा और डीआईजी यस चेनपा अचानक समाधान दिवस में पहुंचे। अधिकारियों की उपस्थिति कम देखकर उन्होंने हाजिरी रजिस्टर की जांच की, जिसमें दर्जनों अधिकारी व कर्मचारी अनुपस्थित मिले। इस पर कमिश्नर ने खुद रजिस्टर में गैरहाजिरी अंकित करते हुए अपने स्टेनो को कार्रवाई हेतु निर्देशित किया, हालांकि आदेश तत्काल जारी नहीं हो सका।
समस्या न पहुंच सके इसके लिए तहसीलदार सुशील प्रताप सिंह और आधा दर्जन राजस्व व पुलिस निरीक्षकों की टीम तैनात रही, जो शिकायतकर्ताओं को कमिश्नर व डीआईजी तक पहुंचने से पहले ही रोक लेती थी और निस्तारण का भरोसा देकर पत्र वापस करवा देती थी।
इस दौरान कुल 92 मामले प्रस्तुत किए गए, जिनमें से केवल 4 मामलों का मौके पर निस्तारण किया गया। प्रस्तुत मामलों में 67 मामले राजस्व विभाग से, 12 पुलिस विभाग से, जबकि शेष सरजू नहर, विद्युत विभाग, जिला कृषि, पूर्ति विभाग और ब्लॉक से संबंधित थे।
उपस्थित प्रमुख अधिकारी: एसडीएम प्रदीप सिंह, तहसीलदार सुशील प्रताप सिंह, नायब तहसीलदार जीवेंद्र तिवारी, विजय प्रताप सिंह, राजस्व निरीक्षक अवधेश यादव, सूर्यनारायण पाठक सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
कमिश्नर की गाड़ी रोक अधिवक्ताओं नें तहसीलदार के खिलाफ किया शिकायत
समाधान दिवस के बाद जब कमिश्नर अनिल कुमार ढींगरा दोपहर 1:09 बजे तहसील सभागार से बाहर निकले, तभी बार एसोसिएशन के मंत्री विनोद गौतम के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने उनकी गाड़ी रोककर तहसीलदार सुशील प्रताप सिंह के खिलाफ शिकायत की।अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि तहसीलदार जानबूझकर दाखिल-खारिज मामलों को लंबित रख रहे हैं और पत्रावलियों में अनावश्यक रूप से चकबंदी से जुड़ी धारा 41 व 45 के पत्र मांग रहे हैं। अधिवक्ताओं ने कहा कि दाखिल-खारिज सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन अनुचित लाभ के लिए उन्हें रोका जा रहा है।इस पर कमिश्नर ने नाराजगी जाहिर करते हुए सभी लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए