संस्कृत साहित्य में भरा है शुद्ध आचरण का संदेश -डाॅक्टर त्रिपाठी

संस्कृत साहित्य में भरा है शुद्ध आचरण का संदेश -डाॅक्टर  त्रिपाठी

सप्त दिवसीय संस्कृत सप्ताह 

हाटा कुशीनगर।दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के संस्कृत विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉक्टर  सूर्यकांत त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत साहित्य में शुद्ध आचरण एवं व्यवहार का अकूत ज्ञान भरा हुआ है जरूरत है हमें इसके गहन अध्ययन से लोकोपयोगी तत्वों को आत्मसात करने की।
वे उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर आयोजित
संस्कृत भारती एवं श्रीनाथ संस्कृत महाविद्यालय, श्रीनाथ संस्कृत उच्ततर माध्यमिक विद्यालय, प्राथमिक अनुभाग के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे संस्कृत सप्ताह के चतुर्थ दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि अपना उद्बोधन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा को जन जन तक पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजन किए जाते हैं। छात्रों में पढ़ने और सीखने की जिज्ञासा बढ़ती है। वाद विवाद, श्लोक,गीत गायन एवं संभाषण के द्वारा बेहतरीन तरीके से बोलने एवं प्रस्तुत करने की क्षमता में वृद्धि होती है।यह विद्या जीवन में सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। कोई भी छात्र अनुराग एवं दृढ़ इच्छा शक्ति से बहुत कुछ सीख सकता है।लगन से ही सफलता के सोपान पर चढ़ सकते हैं। भारतीय चिंतन परंपरा में एकता अखंडता एवं समानता के भाव अंतर्निहित हैं। उन्होंने संस्कृत में गीत सुनाया जो प्रेरणादायक रहा।इस दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में शिक्षक संजय पाण्डेय एवं प्राचार्य डॉ राजेश कुमार चतुर्वेदी, संयोजक डॉक्टर  बशिष्ठ द्विवेदी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉक्टर मोहन पाण्डेय भ्रमर ने कहा कि सात दिन के आयोजन में छात्रों को बहुत कुछ सीखने का व्यावहारिक अनुभव होता है।

संस्कृत में निहित ज्ञान को अर्जित कर निश्चिंत रूप से जीवन को सुखी बना सकते हैं। राष्ट्र एवं समाज के विकास में योगदान दे सकते हैं ।इस दौरान शिक्षक कालिका दूबे डॉ रामानुज द्विवेदी डॉ अमन तिवारी, डॉ राम ऋषि द्विवेदी, डॉक्टर  सतीश चन्द्र शुक्ल, अवधेश सिंह मिथिलेश चौरसिया आदि उपस्थित रहे।संचालन पवन कुमार तिवारी ने किया।

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