झाड़ियों और रेनकट ने बिगाड़ा बांसगांव–कुसमौल मार्ग का हाल, दुर्घटना का बना खतरा
बासगांव से सुबास चंद की रिपोर्ट
बांसगांव से कुसमौल तक लगभग 10 किलोमीटर लंबे मार्ग की हालत इन दिनों अत्यंत दयनीय हो चुकी है। बरसात के मौसम में मार्ग के दोनों ओर उगी झाड़ियां, गहरे रेनकट (पानी से कटाव) और रैट-होल (गड्ढे) आवागमन में सबसे बड़ी बाधा बन गए हैं। इससे रोज़ाना यात्रा कर रहे लोगों की जान पर बन आई है।गौरतलब है कि बीते 1 अगस्त को पं. जवाहरलाल नेहरू इंटर कॉलेज के उप प्रधानाचार्य की गाड़ी इसी मार्ग पर झाड़ियों के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं।
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यह है स्थानीय जनता की खास समस्या
इस सड़क का दो-तिहाई हिस्सा लोक निर्माण विभाग खंड‑3 एवं शेष एक-तिहाई प्रांतीय खंड के अधीन आता है। एसडीएम ने संबंधित अभियंता को तत्काल कार्यवाही हेतु निवासियों की समस्याओं को बताए है वही वहां के निवासियों के अनुसार सड़क किनारे झाड़ियों की अधिकता से विशेषकर मोड़ों पर दृश्यता खत्म हो जाती है। धोबहा घाट से लेकर नगरी कालिका मंदिर तक दर्जनों अंधे मोड़ हैं, जहां दृश्यता न के बराबर है। रात के समय और बिजली न रहने पर स्थिति और अधिक भयावह हो जाती है।
आपको बताते चले कि यह मार्ग राज्य मार्ग NH-24 से जुड़ता है और गोरखपुर–वाराणसी मार्ग की दूरी कम करता है। ऐसे में इसकी खराब हालत यात्रियों के लिए गंभीर खतरा बन गई है। जगह-जगह कटाव और गड्ढों से दोपहिया एवं चार पहिया वाहन फंसने या पलटने की आशंका बनी रहती है।
यह है स्थानीय जनता की खास मांग
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि शीघ्र सड़क की मरम्मत, झाड़ियों की कटाई और रेनकट की भराई की जाए ताकि यात्रा सुरक्षित हो सके।
मामले में देखे क्या कहते है अधिशासी अभियंता
्लो्क निर्माण खंड-2 के अधिशासी अभियंता अरविंद सिंह ने बताया कि “एक माह पहले ही झाड़ियों की कटाई और रेनकट में मिट्टी भराई का कार्य कराया गया था। यदि बारिश के चलते फिर से कटाव हुआ है तो उसे जल्द दुरुस्त कराया जाएगा।”