13 सूत्री मांगों और समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन (महात्मा टिकैत) ने मुख्यमंत्री को प्रेषित किया ज्ञापन
अनील वर्मा की खास रिपोर्ट
भारतीय किसान यूनियन (महात्मा टिकैत) के बैनर तले आज दिनांक 20 जनवरी 2026 को लखनऊ के यूपी प्रेसक्लब में किसानों ने 13 सूत्री मांगों और समस्याओं को लेकर एक प्रेसवार्ता कार्यक्रम किया जिसमें यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अनिल तालान और राष्ट्रीय सचिव राम प्रकाश सिंह ओर प्रदेश प्रभारी ठाकुर तारा सिंह बिष्ट के नेतृत्व में सैंकड़ो किसानों ने मांगो को लेकर आवाज बुलंद की और अपना मांग पत्र ज्ञापन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रेषित कर अनुरोध व्यक्त किया की शीघ्र ही किसानों की मांगों पर मुख्यमंत्री द्वारा कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
उक्त मांगे इस प्रकार है- (1) उ०प्र० के समस्त जिलों में डी०ए०पी० और यूरिया किसानों को बुआई के समय पर नहीं मिलती है तथा बाजार में निर्धारित मूल्य से काफी अधिक कीमत पर खाद बेचकर विक्रेताओं के द्वारा किसानों से अवैध वसूली की जा रही है। रबी फसल की बुआई समय किसानो को पर्याप्त मात्रा में न्यूनतम सरकारी मूल्य पर खाद उपलब्ध करायी जाए। (2) किसान दुर्घटना बीमा में परिवार को इकाई माना जाये, हमारे देश में परम्परा है जब तक पिता जीवित है तब तक जमीन संतान के नाम नहीं आती जबकि 80 वर्षीय बुजुर्ग पिता खेती में कार्य करने नहीं जाते, परिणाम यह होता है कि खाता धारक किसान के अतिरिक्त उसके पुत्रों आदि की मृत्यु पर किसान होने के बाद भी मृतक को किसान दुर्घटना बीमा का लाभ नहीं मिलता। (3) वर्ष 2012 से बाजार की सभी वस्तुएं की कीमत काफी बढ़ गयी हैं, सरकार से अनुरोध है कि किसान दुर्घटना बीमा की राशि को दो-गुना किया जाएं। (4) मृतक आश्रित में सरकार के द्वारा एक आदेश हुआ जिसमें मृतक आश्रित के भाई को भी नौकरी देने की बात की गयी थी। परन्तु सरकार के द्वारा मृतक आश्रित संशोधन नियम में परिवर्तन किया गया है। उम्र की सीमा मृतक आश्रित की क्रियान्वयन तारीख तक उम्र का लाभ दिया जाये। (5) बाढ़ आपदा व सूखा में किसानों को फसल बीमा का सम्पूर्ण लाभ दिया जाये व प्राकृ तिक आपदा के कारण प्रान्तीय सरकार व केन्द्र सरकार के द्वारा 25000- रूपये प्रत्येक किसान को मुआवजा दिया जाये। (6) किसान का एन०पी०ए० अकाउन्ट होने के बाद बैंकें किसान को ऋण देना बंद कर देती है, एन०पी०ए० अकाउन्ट धारक किसानों को भी सुचारू रूप से ऋण का पात्र माना जाना चाहिए। कृषि ऋण को किसानों की सिविल में न जोड़ा जाए। (7) किसानों के बच्चों को शिक्षा ऋण नहीं मिलता है जबकि किसान देश की रीड़ की हड्डी माने जाते है। किसानों को भी शिक्षा ऋण के दायरे में लाया जाये। (8) किसान एवं मजदूरों की घरेलू बिजली 400 यूनिट निःशुल्क की जाये और बिजली चेकिंग के नाम पर किसानों का उत्पीड़न बंद किया जाये। (9) उ०प्र० के किसानों को 550 रूपये प्रति कुन्टल गन्ने का रेट दिया जाये। भारतीय जनता पार्टी ने 2017 के चुनाव से पूर्व 450 रूपये प्रति कुन्टल किसान को गन्ना मूल्य देने के लिए आश्वासन दिया था। आपकी सरकार 2017 से आज तक 9 वर्षों से सत्तासीन है. इसलिए भारतीय किसान महात्मा टिकैत संगठन सरकार से अनुरोध करता है कि आप गन्ना मूल्य पर अपने वादे को व 9 वर्षों की मंहगाई को दृष्टिगत रखते हुए 550 रूपये प्रति कुन्टल का मूल्य किसान को दें। (10) उ०प्र० में जितनी भी नदिया है सबको अभियान चलाकर एक दूसरे से जोड़ दिया जाए जिससे प्रदेश में न तो बाढ़ आयेगी और न ही सूखा रहेगा। इससे जनता जर्नादन को लाभ मिलेगा और मछली पालन में भी व्यापारियों व किसानो को लाभ मिलेगा। भारत रत्न श्रधेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी जी ने अपने कार्यकाल के समय देश की सारी नदियों को एक दूसरे से जोड़ने की योजना बनायी थी जिसको प्रदेश में आजतक धरातल पर नही उतारा गया है जिससे प्रत्येक वर्ष बाढ़ व सूखे में किसानो की लाखों बीघा जमीन की फसले नष्ट हो जाती है। आप योजना को धरातल पर लाने में सक्षम है और नदी जोड़ने का सौभाग्य भी आपको मिलेगा जो पूरे देश के लिये एक मिशाल बनेगी। (11) 2022 के घोषणा पत्र में भाजपा द्वारा एक हजार करोड़ रूपये का प्रदेश के किसानो से आलू, टमाटर, प्याज जैसी सभी फसलो के न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने का वादा किया था जो अभी तक पूरा नही किया गया है। तत्काल रूप से वादे को पूरा किया जाए आलू, टमाटर, प्याज उत्पादक किसान काफी समय से बड़े घाटे को झेलते चले आ रहे है अपने घोषणा पत्र में किये गये वादे के अनुसार किसानो को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने का कार्य किया जाए। (12) भूमि अधिगृहण में 2013 भूमि अधिगृहण एक्ट का क्रियान्वयन अतिआवश्यक है। और जिस जिले के किसी भी क्षेत्र में कई वर्षों से सर्किल रेट नही बढ़ाये गये है वहा के सर्किल रेट को पूर्व अवधि से रूके हुए व वर्तमान तक बढ़ाया जाए। (13) प्रदेश के प्रत्येक जनपद में किसान दिवस का आयोजन किया जाए जैसे जनपद लखनऊ में राजधानी होने के बावजूद किसान दिवस का आयोजन नही किया जा रहा है।