बाल विवाह मुक्त जनपद बनाने में संवाद सामाजिक संस्थान की लोगो से अपील, सभी मिलकर प्रशासन को सहयोग करें- पूनम तिवारी

अनिल वर्मा की खास रिपोर्ट –

भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर चले 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के तहत जिले के गांवों व कस्बों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहे ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ की यात्रा का समापन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के समापन अवसर पर एक कार्यक्रम में संवाद सामाजिक संस्थान की कार्यकारी निदेशक पूनम तिवारी ने कहा कि हमारे प्रयासों को मिली प्रतिक्रिया से हम आश्वस्त हैं कि बाल विवाह मुक्त लखनऊ और बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करते के बेहद करीब हैं। संवाद सामाजिक संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए जमीन पर काम कर रहे 250 से भी ज्यादा नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फार चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है। जिले में बाल विवाह मुक्ति रथ को क्षेत्र के सम्मानित नागरिकों एवं जनपद स्तर के अधिकारियों ने हस्ताक्षर कर बाल विवाह मुक्त जनपद प्रतापगढ के अभियान को पूर्ण समर्थन दिया। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के साल भर पूरा होने के अवसर पर भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने चार दिसंबर, 2025 को देशव्यापी 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान का एलान किया था। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठनों ने इस अभियान की मोर्चे से अगुआई करते हुए देश के 439 जिलों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का संदेश देने के लिए ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ निकाले। इस रथ ने जिले के तमाम गांवों और कस्बों में घूम-घूम कर लोगों को बाल विवाह के स्वास्थ्य, शिक्षा व आजीविका पर दुष्परिणामों से अवगत कराया और इसके कानूनी पहलुओं की जानकारी देते हुए समझाया कि बाल विवाह दंडनीय अपराध है। संवाद सामाजिक संस्थान के कार्यक्रम मैनेजर आलोक मिश्रा ने बताते हुए कहा कि बाल विवाह के खिलाफ इस 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान और इसके तहत निकाले गए ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा, “यह कोई प्रतीकात्मक यात्रा नहीं थी। यह पहियों पर बदलाव का संदेश था जिसे लोगों ने स्वीकार किया और सराहा। संस्थान के कार्यक्रम मैनेजर विनोद कुमार ने कहा कि अब लगभग पूरी सभ्य दुनिया ने हमारी यह बात मान ली है कि बाल विवाह कोई सामाजिक कुप्रथा नहीं बल्कि विवाह की आड़ में बच्चों से बलात्कार है। यह एक अपराध है और कानूनन दंडनीय है। बाल विवाह किसी भी बच्ची के जीवन के पुष्पित-पल्लवित होने की संभावनाओं को ही खत्म कर देता है और बच्चियों को कुपोषण, अशिक्षा व गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देता है।संवाद सामाजिक संस्थान की कार्यकारी निदेशक पूनम तिवारी ने कार्यक्रम के बारे में विस्तार पूर्वक बताते हुए कहा कि सरकार, प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से यह अभियान एक व्यापक जनभागीदारी वाले जन अभियान में तब्दील हो गया। सभी के सहयोग से बाल विवाह के खात्मे के लिए कानून, सुरक्षा और जवाबदेही के संकल्प को हम जनसमुदाय तक ले गए ताकि बाल विवाह मुक्त लखनऊ का लक्ष्य वास्तविकता में बदल सके। तीन चरणों में चले इस अभियान के पहले चरण में शैक्षणिक संस्थानों व दूसरे चरण में धर्मगुरुओं को जोड़ा गया और उनसे अनुरोध किया गया कि वे विवाह संपन्न कराने से पूर्व आयु की जांच कर लें और बाल विवाह संपन्न कराने से इनकार करें। साथ ही, कैटरर्स, सजावट वालों, बैंक्वेट हाल मालिकों व विवाह में सेवाएं देने वाले बैंड वालों, घोड़ी वालों से संपर्क कर अनुरोध किया गया कि वे बाल विवाह में अपनी सेवाएं नहीं दें क्योंकि बाल विवाह में किसी भी रूप में शामिल होने या सहयोग देने पर उन्हें सजा हो सकती है। तीसरे चरण में जिले की पंचायतों में जागरूकता अभियान चलाया गया।

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