चौरी चौरा नगर पंचायत में RTI की दस्तक: सभासद संदीप विश्वकर्मा ने मांगा तीन साल के बजट और पोखरा सुंदरीकरण का पूरा हिसाब

 

आशुतोष कुमार पाण्डेय की रिपोर्ट 

चौरी चौरा नगर पंचायत चौरी चौरा में विकास कार्यों की पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। भारतीय जनता पार्टी के मनोनीत सभासद संदीप कुमार विश्वकर्मा ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम-2005 के तहत तीन अलग-अलग आवेदन देकर नगर पंचायत क

पिछले तीन वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड और वार्ड संख्या-7 स्थित पोखरे के सुंदरीकरण कार्य का विस्तृत विवरण मांगा है।


सभासद ने 6 जून 2026 को अधिशासी अधिकारी को दिए गए आवेदनों में 1 जनवरी 2023 से 31 दिसंबर 2025 तक नगर पंचायत की कुल आय-व्यय, विकास कार्यों पर हुए खर्च, टेंडर प्रक्रिया और ठेकेदारों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है।


विकास कार्यों पर मांगा पूरा लेखा-जोखा
RTI आवेदन में सभासद ने पूछा है कि पिछले तीन वर्षों में सरकार से नगर पंचायत को विकास कार्यों के लिए कितनी धनराशि प्राप्त हुई और उसका उपयोग किन-किन मदों में किया गया। उन्होंने सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट समेत सभी विकास कार्यों की सूची, उनकी लागत, संबंधित ठेकेदारों के नाम तथा टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां भी मांगी हैं।
      शहीद नगर के पोखरे पर उठाए सवाल

दूसरे आवेदन में वार्ड संख्या-7 शहीद नगर स्थित गंगा प्रसाद स्मारक इंटर कॉलेज के सामने स्थित पोखरे के सुंदरीकरण कार्य का पूरा ब्योरा मांगा गया है। इसमें योजना की स्वीकृति तिथि, स्वीकृत बजट, परियोजना की डिजाइन, लंबाई-चौड़ाई-गहराई, दीवारों की ऊंचाई और मोटाई सहित तकनीकी विवरण की मांग की गई है।
इसके अलावा कार्य का नक्शा, BOQ (प्राक्कलित लागत), खर्च का विवरण, कार्यादेश तथा संबंधित ठेकेदार या संस्था की जानकारी भी मांगी गई है।
“जनता के पैसे का पाई-पाई का हिसाब जरूरी”
सभासद संदीप विश्वकर्मा का कहना है कि नगर पंचायत में विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि कई स्थानों पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता के धन का उपयोग किस प्रकार हुआ, इसकी जानकारी जनता को मिलनी चाहिए।

गोपाल शिशु मंदिर के पास का निर्माणाधीन पोखरा👆
उन्होंने कहा, “शहीद नगर के पोखरे पर लाखों रुपये खर्च होने की बात कही जा रही है, लेकिन धरातल पर कार्य की गुणवत्ता और वास्तविक खर्च को लेकर सवाल हैं। टेंडर किसे मिला, डिजाइन क्या स्वीकृत हुई और धनराशि कहां खर्च हुई, इसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए।”
30 दिन में जवाब देने की मांग
अपने आवेदन में सभासद ने RTI अधिनियम की धारा 7(1) का हवाला देते हुए 30 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही यह भी कहा है कि यदि मांगी गई सूचना किसी अन्य विभाग से संबंधित हो तो धारा 6(3) के तहत आवेदन को संबंधित विभाग को स्थानांतरित किया जाए।
जवाब पर टिकी निगाहें
नगर पंचायत के इतिहास में संभवतः पहली बार किसी सभासद ने एक साथ पूरे बजट और किसी विशिष्ट विकास परियोजना पर विस्तृत RTI दाखिल कर वित्तीय पारदर्शिता की मांग की है। अब निगाहें 30 दिन के भीतर मिलने वाले जवाब पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बीते तीन वर्षों में विकास कार्यों पर कितना और कहां खर्च हुआ तथा पोखरे के सुंदरीकरण की वास्तविक स्थिति क्या है।

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